प्रहलाद गुंजल का बयान: “चप्पल तोड़कर राजनीति में बना नेता, जरूरत पड़ी तो रात 2 बजे भी जनता के लिए खड़ा रहूंगा
जसप्रीत सिंह/चीफ राजस्थान
राजस्थान। वरिष्ठ राजनीतिक नेता प्रहलाद गुंजल ने अपने संघर्षपूर्ण राजनीतिक सफर को लेकर एक भावुक और सशक्त बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वे किसी सिफारिश या दिखावे के सहारे नहीं, बल्कि कठिन परिश्रम और जनता की सेवा के दम पर राजनीति में आगे बढ़े हैं।
प्रहलाद गुंजल ने कहा, “मैं चप्पल उठाकर नेता नहीं बना हूं, बल्कि चप्पल तोड़कर राजनीति में नेता बना हूं। यह सफर संघर्ष, मेहनत और आम जनता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने का परिणाम है।” उन्होंने अपने बयान के माध्यम से यह संदेश दिया कि राजनीति में उनकी पहचान जमीन से जुड़ी सोच और निरंतर जनसेवा से बनी है।
उन्होंने आगे कहा कि जनता की मदद और समस्याओं के समाधान के लिए वे हर समय उपलब्ध रहने को तैयार हैं। “अगर किसी को मेरी जरूरत होगी तो मैं रात के 2 बजे भी खड़ा रहूंगा, चाहे इसके लिए मुझे अपनी जान तक जोखिम में डालनी पड़े,” ऐसा कहते हुए उन्होंने अपने समर्पण और जिम्मेदारी की भावना को स्पष्ट किया।
गुंजल के इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। समर्थकों ने इसे उनके संघर्ष और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया है, वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह बयान जनता से भावनात्मक जुड़ाव मजबूत करने और अपनी जमीनी छवि को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश है।
प्रहलाद गुंजल के इस बयान ने एक बार फिर राजनीति में संघर्ष, सेवा और जिम्मेदारी जैसे मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया